भारत के मौसमी त्योहार विभिन्न जलवायु क्षेत्रों, कृषि कैलेंडर और धार्मिक संस्कारों के मेल से जुड़े होते हैं, जो हर क्षेत्र में अलग-अलग त्योहार और प्रथाएँ पैदा करते हैं। नीचे चार ऋतुओं के अनुसार प्रमुख मौसमी त्योहार और जलवायु की विशेषताएँ दी गई हैं।
वसंत (मार्च से मई)
जलवायु की विशेषताएँ
- तापमान: उत्तर में दिन का तापमान लगभग 30 डिग्री सेल्सियस, रात का तापमान 15-20 डिग्री सेल्सियस। दक्षिण में तापमान और भी अधिक होता है।
- वर्षा: ग्रीष्म मानसून से पहले का सूखा मौसम, लेकिन उत्तर-पूर्व में फ्रंटल वर्षा होती है।
- विशेषताएँ: दिन में तेज धूप और सूखी स्थिति, सुबह और शाम के बीच का तापमान परिवर्तन।
प्रमुख कार्यक्रम/संस्कृति
महीना |
कार्यक्रम |
विवरण/जलवायु के साथ संबंध |
मार्च |
होली (रंगों का त्योहार) |
वसंत विषुव से जुड़ा। पानी और रंग के साथ खेलकर सूखे मौसम की बचे खुचे रंगों का आनंद लेना। |
मार्च |
चैटित्तर पर्व |
पश्चिम बंगाल में मनाया जाता है। बौद्ध धर्म के आगमन की स्मृति में, सुखद मौसम में तीर्थयात्रा। |
अप्रैल |
विक्रम नववर्ष (पंजाब क्षेत्र) |
सर्दियों से गर्मियों में बदलने के मौसम में नववर्ष का जश्न। |
अप्रैल से मई |
बैसाखी (फसल उत्सव) |
सर्दी की गेहूँ की फसल पूरी होने के बाद का त्योहार। शुभ मौसम में, नृत्य और बाहरी आयोजनों की सक्रियता। |
मई |
रथा-गंग (महाप्रार्थना पर्व) |
तमिलनाडु में पर्वतीय पूजा। गर्मी के दौरान, तीर्थयात्री पहाड़ पर चढ़ने की परंपरा। |
ग्रीष्म (जून से अगस्त)
जलवायु की विशेषताएँ
- तापमान: मैदानों में 35-45 डिग्री सेल्सियस। दक्षिण और पश्चिम दिल्ली कॉरिडोर में कभी-कभी 50 डिग्री के करीब।
- वर्षा: जून के मध्य से सितंबर के प्रारंभ में मानसून आता है। पश्चिमी तट और उत्तर-पूर्व में मूसलधार बारिश।
- विशेषताएँ: उच्च आर्द्रता, उच्च तापमान, बिजली और बाढ़ का खतरा।
प्रमुख कार्यक्रम/संस्कृति
महीना |
कार्यक्रम |
विवरण/जलवायु के साथ संबंध |
जून |
गणेश चतुर्थी |
धार्मिक कार्यक्रम। घरों और चौराहों पर गणेश की मूर्तियाँ स्थापित की जाती हैं, वर्षा के दौरान सजावटी चीज़ें बह जाती हैं। |
जुलाई |
रथा-मीरा (संतों की परेड) |
ईसाई मन्दिरों के चारों ओर परेड। तेज बारिश में भी आस्तिक चलते हैं। |
जुलाई |
बुनगे-टो नृत्य उत्सव |
केरल राज्य। मानसून की कृपा का जश्न मनाने के लिए नृत्य और नाव दौड़। |
अगस्त |
स्वतंत्रता दिवस |
15 तारीख। बारिश के बीच बाहरी समारोह और परेड आयोजित होती हैं। |
अगस्त |
तीज (महिलाओं का उत्सव) |
उत्तर में मनाया जाता है। अनुष्ठान में अधिकतर इनडोर कार्यक्रम होते हैं, लेकिन बारिश के बीच बाहरी सभाएँ भी होती हैं। |
शरद (सितंबर से नवंबर)
जलवायु की विशेषताएँ
- तापमान: मानसून समाप्त होने के बाद तापमान लगभग 30 डिग्री सेल्सियस पर आ जाता है। सुबह और शाम का तापमान 20 डिग्री के आसपास होता है।
- वर्षा: सितंबर के प्रारंभ में अंतिम भारी वर्षा। इसके बाद सूखे मौसम में परिवर्तन।
- विशेषताएँ: हवा साफ होती है, धूप बढ़ जाती है। कृषि और फसल गतिविधियाँ जोर पकड़ लेती हैं।
प्रमुख कार्यक्रम/संस्कृति
महीना |
कार्यक्रम |
विवरण/जलवायु के साथ संबंध |
सितंबर |
गंगाट्री पर्व |
गंगा नदी के किनारे जल के भगवान का पूजन। प्रचुर जल के बीच अनुष्ठान। |
सितंबर से अक्टूबर |
दुर्गा पूजा (देवी पूजा पर्व) |
उत्तर-पूर्व में भव्य समारोह। शरदिमा के आकाश के नीचे बड़ी पूजा पंडालों की भीड़। |
अक्टूबर |
दशहरा (विजय का पर्व) |
लक्ष्मी नदी आदि के किनारे बड़े अग्नि उत्सव। सूखी जलवायु प्रदर्शन को सहायक बनाती है। |
अक्टूबर से नवंबर |
दीपावली (रोशनी का पर्व) |
सूखे मौसम की रात में रोशनी का एहसास। तापमान में अंतर रात्रि की जादुईता को अधिक स्पष्ट करता है। |
नवंबर |
करवा चौथ |
महिलाओं की लंबे जीवन की प्रार्थना। बाहरी प्रार्थना और नगर मार्च सुखद जलवायु में आयोजित किए जाते हैं। |
शीत (दिसंबर से फरवरी)
जलवायु की विशेषताएँ
- तापमान: उत्तरी मैदानों में 5-20 डिग्री सेल्सियस, राजस्थान के रेगिस्तान में दिन और रात के तापमान का बड़ा अंतर। दक्षिण में 20-30 डिग्री गर्म।
- वर्षा: लगभग कोई वर्षा नहीं। उत्तर-पूर्व में थोड़ी मात्रा में फ्रंटल वर्षा होती है।
- विशेषताएँ: सूखी धूप का मौसम, पर्यटन का समय।
प्रमुख कार्यक्रम/संस्कृति
महीना |
कार्यक्रम |
विवरण/जलवायु के साथ संबंध |
दिसंबर |
क्रिसमस |
दक्षिण और शहरी क्षेत्रों में चर्चों में प्रार्थनाएँ। सुखद जलवायु में बाहरी बाजारों में भीड़। |
जनवरी |
मकर संक्रांति |
सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के दिन का जश्न। पतंगबाज़ी और चावल के तेल महोत्सव शांत मौसम में आयोजित होते हैं। |
जनवरी |
लोहरी/पोंगल |
उत्तरी/दक्षिणी भाग में अलग-अलग उत्सव। फसल की खुशी का प्रदर्शन सूखी मौसम के चमकदारी का सहारा लेता है। |
जनवरी |
गणतंत्र दिवस |
26 तारीख। परेड और संगीत कार्यक्रम बाहरी में आयोजित किए जाते हैं। ठंडा मौसम समारोह के लिए उपयुक्त है। |
फरवरी |
होग (सरसों का त्योहार) |
उत्तर-पूर्व के असम राज्य। खिलखिलाते फूलों के बाग़ का अन्वेषण। सुखद जलवायु में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होती है। |
मौसमी त्योहार और जलवायु का संबंध संक्षेप
ऋतु |
जलवायु की विशेषताएँ |
प्रमुख त्योहारों के उदाहरण |
वसंत |
सूखा, तापमान वृद्धि, तापमान में अंतर |
होली, बैसाखी, रथा-गंग |
ग्रीष्म |
उच्च तापमान और आर्द्रता, मानसून की भारी वर्षा |
गणेश चतुर्थी, स्वतंत्रता दिवस |
शरद |
मानसून समाप्त होते ही सुखद जलवायु |
दुर्गा पूजा, दीपावली |
शीत |
सूखा और धूप, रात दिन का तापमान अंतर (उत्तर में) और गर्म (दक्षिण में) |
मकर संक्रांति, गणतंत्र दिवस |
अतिरिक्त जानकारी
- भारत के त्योहार कृषि कैलेंडर या चंद्र कैलेंडर के आधार पर होते हैं, जो मौसम के परिवर्तन के साथ गहराई से जुड़े होते हैं।
- क्षेत्र के अनुसार एक ही ऋतु में त्योहार और उनके नाम भिन्न होते हैं, जो विविधता दर्शाते हैं।
- मानसून की अवधि में वर्षा की प्रार्थना और समृद्धि की प्रार्थनाएँ महत्वपूर्ण होती हैं।
- शीत के सूखे मौसम बाहरी आयोजनों और पर्यटन के लिए उपयुक्त होते हैं, और यहाँ घरेलू और विदेशी पर्यटकों की आमद होती है।
भारत में जलवायु की चार ऋतुएँ संस्कृति और प्रथाओं के निर्माण में बड़ा असर डालती हैं, और त्योहारों के माध्यम से प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की भावना विकसित होती है।